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भीष्म पर्व
अध्याय १०३
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सञ्जय़ उवाच
किं कार्यं वः करोम्यद्य युष्मत्प्रीतिविवर्धनम् |  ५६   क
सर्वात्मना च कर्तास्मि यद्यपि स्यात्सुदुष्करम् ||  ५६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति