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वन पर्व
अध्याय २८१
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यम उवाच
स्वमेव राज्यं प्रतिपत्स्यतेऽचिरा; न्न च स्वधर्मात्परिहास्यते नृपः |  ३२   क
कृतेन कामेन मय़ा नृपात्मजे; निवर्त गच्छस्व न ते श्रमो भवेत् ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति