menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २८१
chevron_left
chevron_right
सावित्र्यु उवाच
न दूरमेतन्मम भर्तृसंनिधौ; मनो हि मे दूरतरं प्रधावति |  ३९   क
तथा व्रजन्नेव गिरं समुद्यतां; मय़ोच्यमानां शृणु भूय़ एव च ||  ३९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति