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वन पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्य नाशं विनाशं वा जरय़ा मरणेन वा |  ३६   क
अनर्थमिति मन्यन्ते सोऽय़मस्मासु वर्तते ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति