menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २८१
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
शिरोभितापसन्तप्तः स्थातुं चिरमशक्नुवन् |  ६८   क
तवोत्सङ्गे प्रसुप्तोऽहमिति सर्वं स्मरे शुभे ||  ६८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति