वन पर्व  अध्याय २८१

सावित्र्यु उवाच

ततोऽग्निमानय़ित्वेह ज्वालय़िष्यामि सर्वतः |  ७७   क
काष्ठानीमानि सन्तीह जहि सन्तापमात्मनः ||  ७७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति