वन पर्व  अध्याय २८१

सत्यवानु उवाच

शिरोरुजा निवृत्ता मे स्वस्थान्यङ्गानि लक्षय़े |  ८०   क
मातापितृभ्यामिच्छामि सङ्गमं त्वत्प्रसादजम् ||  ८०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति