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द्रोण पर्व
अध्याय ९०
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सञ्जय़ उवाच
विव्याध पाण्डवान्युद्धे त्रिभिस्त्रिभिरजिह्मगैः |  ३४   क
शिखण्डिनं च विव्याध त्रिभिः पञ्चभिरेव च ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति