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शान्ति पर्व
अध्याय २८२
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पराशर उवाच
सुखे वा यदि वा दुःखे वर्तमानो विचक्षणः |  ७   क
यश्चिनोति शुभान्येव स भद्राणीह पश्यति ||  ७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति