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वन पर्व
अध्याय २८२
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गौतम उवाच
वेदाः साङ्गा मय़ाधीतास्तपो मे सञ्चितं महत् |  ११   क
कौमारं व्रह्मचर्यं मे गुरवोऽग्निश्च तोषिताः ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति