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मौसल पर्व
अध्याय ८
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वैशम्पाय़न उवाच
कलत्रस्य वहुत्वात्तु सम्पतत्सु ततस्ततः |  ५६   क
प्रय़त्नमकरोत्पार्थो जनस्य परिरक्षणे ||  ५६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति