आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ५०

व्रह्मो उवाच

चित्तं चित्तादुपागम्य मुनिरासीत संय़तः |  २७   क
यच्चित्तस्तन्मना भूत्वा गुह्यमेतत्सनातनम् ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति