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शान्ति पर्व
अध्याय २८४
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पराशर उवाच
तपः सर्वगतं तात हीनस्यापि विधीय़ते |  १४   क
जितेन्द्रिय़स्य दान्तस्य स्वर्गमार्गप्रदेशकम् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति