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शान्ति पर्व
अध्याय २८४
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पराशर उवाच
ये चादौ व्रह्मणा सृष्टा व्राह्मणास्तपसा पुरा |  १८   क
ते भावय़न्तः पृथिवीं विचरन्ति दिवं तथा ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति