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शान्ति पर्व
अध्याय २८४
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पराशर उवाच
अप्रय़त्नागताः सेव्या गृहस्थैर्विषय़ाः सदा |  ३५   क
प्रय़त्नेनोपगम्यश्च स्वधर्म इति मे मतिः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति