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शान्ति पर्व
अध्याय २८४
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पराशर उवाच
क्रिय़माणं यदा कर्म नाशं गच्छति मानुषम् |  ३७   क
तेषां नान्यदृते लोके तपसः कर्म विद्यते ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति