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शान्ति पर्व
अध्याय २८४
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पराशर उवाच
सर्वात्मना तु कुर्वीत गृहस्थः कर्मनिश्चय़म् |  ३८   क
दाक्ष्येण हव्यकव्यार्थं स्वधर्मं विचरेन्नृप ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति