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शान्ति पर्व
अध्याय २८४
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पराशर उवाच
यथा नदीनदाः सर्वे सागरे यान्ति संस्थितिम् |  ३९   क
एवमाश्रमिणः सर्वे गृहस्थे यान्ति संस्थितिम् ||  ३९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति