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शान्ति पर्व
अध्याय २८४
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पराशर उवाच
ततो लोभाभिभूतात्मा सङ्गाद्वर्धय़ते जनम् |  ७   क
पुष्ट्यर्थं चैव तस्येह जनस्यार्थं चिकीर्षति ||  ७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति