menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ५८
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
पुनश्च राज्ञः पतितस्य भूमौ; स तां गदां स्कन्धगतां निरीक्ष्य |  १२   क
वामेन पादेन शिरः प्रमृद्य; दुर्योधनं नैकृतिकेत्यवोचत् ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति