शान्ति पर्व  अध्याय २८५

पराशर उवाच

एते स्वां प्रकृतिं प्राप्ता वैदेह तपसोऽऽश्रय़ात् |  १६   क
प्रतिष्ठिता वेदविदो दमे तपसि चैव हि ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति