शान्ति पर्व  अध्याय २८५

पराशर उवाच

विशेषधर्मा नृपते वर्णानां परिकीर्तिताः |  २२   क
धर्मान्साधारणांस्तात विस्तरेण शृणुष्व मे ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति