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शान्ति पर्व
अध्याय २८५
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पराशर उवाच
यथा यथा हि सद्वृत्तमालम्वन्तीतरे जनाः |  ३०   क
तथा तथा सुखं प्राप्य प्रेत्य चेह च शेरते ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति