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शान्ति पर्व
अध्याय २८५
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पराशर उवाच
जात्या च कर्मणा चैव दुष्टं कर्म निषेवते |  ३३   क
जात्या दुष्टश्च यः पापं न करोति स पूरुषः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति