शान्ति पर्व  अध्याय ४९

वासुदेव उवाच

अथ सत्यवती गर्भं क्षत्रिय़ान्तकरं तदा |  १६   क
धारय़ामास दीप्तेन वपुषा घोरदर्शनम् ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति