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शान्ति पर्व
अध्याय २८५
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पराशर उवाच
प्रश्रिता विनय़ोपेता दमनित्याः सुसंशिताः |  ३८   क
प्रय़ान्ति स्थानमजरं सर्वकर्मविवर्जिताः ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति