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शान्ति पर्व
अध्याय २८५
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पराशर उवाच
सुक्षेत्राच्च सुवीजाच्च पुण्यो भवति सम्भवः |  ४   क
अतोऽन्यतरतो हीनादवरो नाम जाय़ते ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति