आदि पर्व  अध्याय ६४

वैशम्पाय़न उवाच

एक एवोत्तमवलः क्षुत्पिपासासमन्वितः |  २   क
स वनस्यान्तमासाद्य महदीरिणमासदत् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति