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आदि पर्व
अध्याय २११
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्र दानं ददुर्वीरा व्राह्मणानां सहस्रशः |  २   क
भोजवृष्ण्यन्धकाश्चैव महे तस्य गिरेस्तदा ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति