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शान्ति पर्व
अध्याय २८६
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पराशर उवाच
अधीत्य वेदांस्तपसा व्रह्मचारी; यज्ञाञ्शक्त्या संनिसृज्येह पञ्च |  ३०   क
वनं गच्छेत्पुरुषो धर्मकामः; श्रेय़श्चित्वा स्थापय़ित्वा स्ववंशम् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति