शान्ति पर्व  अध्याय २८६

पराशर उवाच

उपभोगैरपि त्यक्तं नात्मानमवसादय़ेत् |  ३१   क
चण्डालत्वेऽपि मानुष्यं सर्वथा तात दुर्लभम् ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति