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शान्ति पर्व
अध्याय २८६
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पराशर उवाच
यस्तु प्रीतिपुरोगेण चक्षुषा तात पश्यति |  ३५   क
दीपोपमानि भूतानि यावदर्चिर्न नश्यति ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति