शान्ति पर्व  अध्याय २८६

पराशर उवाच

सान्त्वेनानुप्रदानेन प्रिय़वादेन चाप्युत |  ३६   क
समदुःखसुखो भूत्वा स परत्र महीय़ते ||  ३६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति