वन पर्व  अध्याय २८६

कर्ण उवाच

न मे दारा न मे पुत्रा न चात्मा सुहृदो न च |  २   क
तथेष्टा वै सदा भक्त्या यथा त्वं गोपते मम ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति