शान्ति पर्व  अध्याय २८७

भीष्म उवाच

पुनरेव तु पप्रच्छ जनको मिथिलाधिपः |  १   क
पराशरं महात्मानं धर्मे परमनिश्चय़म् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति