शान्ति पर्व  अध्याय २८७

पराशर उवाच

विषय़ानश्नुते यस्तु न स भोक्ष्यत्यसंशय़म् |  २४   क
यस्तु भोगांस्त्यजेदात्मा स वै भोक्तुं व्यवस्यति ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति