शान्ति पर्व  अध्याय २८७

पराशर उवाच

यथा भारावसक्ता हि नौर्महाम्भसि तन्तुना |  ३१   क
तथा मनोऽभिय़ोगाद्वै शरीरं प्रतिकर्षति ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति