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द्रोण पर्व
अध्याय १२२
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धृतराष्ट्र उवाच
योऽसौ कर्णेन वीरेण वार्ष्णेय़स्य समागमः |  ३५   क
हते तु भूरिश्रवसि सैन्धवे च निपातिते ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति