शान्ति पर्व  अध्याय २८७

पराशर उवाच

स्नेहपाशैर्वहुविधैरासक्तमनसो नराः |  ३३   क
प्रकृतिस्था विषीदन्ति जले सैकतवेश्मवत् ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति