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शान्ति पर्व
अध्याय २८७
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पराशर उवाच
शरीरगृहसंस्थस्य शौचतीर्थस्य देहिनः |  ३४   क
वुद्धिमार्गप्रय़ातस्य सुखं त्विह परत्र च ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति