शान्ति पर्व  अध्याय २८७

पराशर उवाच

न माता न पिता किञ्चित्कस्यचित्प्रतिपद्यते |  ३७   क
दानपथ्योदनो जन्तुः स्वकर्मफलमश्नुते ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति