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शान्ति पर्व
अध्याय २८७
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पराशर उवाच
छित्त्वाधर्ममय़ं पाशं यदा धर्मेऽभिरज्यते |  ४   क
दत्त्वाभय़कृतं दानं तदा सिद्धिमवाप्नुय़ात् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति