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शान्ति पर्व
अध्याय २८७
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पराशर उवाच
अद्वैधमनसं युक्तं शूरं धीरं विपश्चितम् |  ४१   क
न श्रीः सन्त्यजते नित्यमादित्यमिव रश्मय़ः ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति