menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८५
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
सा वद्धा तत्र तैस्तूर्णमृषिभिर्भरतर्षभ |  ४६   क
नौर्मत्स्यस्य वचः श्रुत्वा शृङ्गे हिमवतस्तदा ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति