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वन पर्व
अध्याय २८७
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वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणा हि परं तेजो व्राह्मणा हि परं तपः |  १६   क
व्राह्मणानां नमस्कारैः सूर्यो दिवि विराजते ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति