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वन पर्व
अध्याय २८७
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वैशम्पाय़न उवाच
दौष्कुलेय़ा विशेषेण कथञ्चित्प्रग्रहं गताः |  २६   क
वालभावाद्विकुर्वन्ति प्राय़शः प्रमदाः शुभे ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति