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शान्ति पर्व
अध्याय २८८
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हंस उवाच
न वै देवा हीनसत्त्वेन तोष्याः; सर्वाशिना दुष्कृतकर्मणा वा |  ३७   क
सत्यव्रता ये तु नराः कृतज्ञा; धर्मे रतास्तैः सह सम्भजन्ते ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति