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भीष्म पर्व
अध्याय १११
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सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य पाण्डवं च धनञ्जय़म् |  २२   क
भीष्मस्य पातने यत्नं परमं ते समास्थिताः ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति