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वन पर्व
अध्याय २८८
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्राग्निशरणे कॢप्तमासनं तस्य भानुमत् |  १७   क
आहारादि च सर्वं तत्तथैव प्रत्यवेदय़त् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति