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शान्ति पर्व
अध्याय २८९
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भीष्म उवाच
नागान्नगान्यक्षगणान्दिशश्च; गन्धर्वसङ्घान्पुरुषान्स्त्रिय़श्च |  ६१   क
परस्परं प्राप्य महान्महात्मा; विशेत योगी नचिराद्विमुक्तः ||  ६१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति